अमरावती. शहर की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर उठे विवाद ने अब न्यायिक मोड़ ले लिया है। प्रभागवार 55 सफाई कर्मियों की अनिवार्यता संबंधी मनपा की सख्त शर्त के खिलाफ ठेकेदारों की आपत्ति हाई कोर्ट पहुंच गई है। गुरुवार को मुंबई हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ में इस मामले पर सुनवाई
हुई, जिसमें न्यायमूर्ति अनिल किल्लोर की एकल पीठ ने अमरावती महानगरपालिका को आठ दिन के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। यह याचिका पूर्व नगर सेवक बालू भुयार समेत अन्यों ने दायर की।
मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा ने शहर की सफाई व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के उद्देश्य से प्रत्येक प्रभाग में कम से कम 55 सफाई कर्मी नियुक्त करना अनिवार्य कर दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि यदि किसी भी ठेकेदार ने इस नियम का पालन नहीं किया, तो उस पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस निर्णय से असहमत स्वच्छता ठेकेदारों ने मनपा को पत्र लिखकर ठेके की दरें बढ़ाने और पुराने बकाया का तत्काल भुगतान करने की मांग की थी।
यही पत्र अब हाईकोर्ट में स्वच्छता ठेके से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मनपा ने जीईएम पोर्टल के नियमों का उल्लंघन किया है तथा अन्य महानगरपालिकाओं द्वारा ब्लैकलिस्ट किए गए ठेकेदारों को ठेका प्रदान किया गया है। यह याचिका कांग्रेस के कुछ पूर्व पार्षदों और निविदा प्रक्रिया में भाग लेने वाले एक ठेकेदार द्वारा दायर की गई थी।
ठेकेदारों से मांगा स्पष्टीकरण हाईकोर्ट ने जहां मनपा से तीन दिन के भीतर ठेकेदारों से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया है, वहीं ठेकेदारों को भी सात दिन के भीतर न्यायालय में अपना जवाब पेश करने को कहा गया है। आने वाले सप्ताह में यह देखना अहम होगा कि मनपा और ठेकेदार हाईकोर्ट में क्या रुख अपनाते हैं।
विधि अधिकारी की सलाह लेकर प्रस्तुत करेंगे जवाब स्वच्छता ठेकेदारों द्वारा प्रस्तुत पत्र के आधार पर हाईकोर्ट ने मनपा से जवाब तलब किया है। इस संबंध में विधि अधिकारी की सलाह लेकर न्यायालय को उपयुक्त उत्तर भेजा जाएगा।
– शिल्पा नाईक, अतिरिक्त आयुक्त, मनपा
Author: Z 24 News
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